Wednesday, April 8, 2020
एक रोटी के दो हिस्सों की कहानीः96
Thursday, March 26, 2020
हिमालय के पैरों में चांदी की पाजेब -धर्मशाला
यहां की वादियों में हवाओं का पैगाम है, ठीक इसी जगह पर आकर धरती आसमान से अपने इश्क का इज़हार करती मिल जाती है। इस धरती पर स्वर्ग सिर्फ क़श्मीर में ही नहीं मिलता,धर्मशाला आकर भी आपको पहाडों से इश्क हुए बिना नहीं रहा जायेगा। पिछले कई महीनों से हिमाचल से दोस्त संदीप रोज़ाना ही फोन करके धर्मशाला आने का न्यौता दे रहे थे। जो इस बार दिवाली की छुट्टियां धर्मशाला में ही खर्च करने का फैसला ले लिया गया। हल्की ठंड ने अपनी दस्तक देनी शुरू कर दी थी और इस ठंड को साथ लेकर मैं धर्मशाला की ओर
चल पडा।
Sunday, June 2, 2019
रूमानी किस्सों का अहसास है ये इश़्क
इश़्क के कई मायने होते हैं, कुछ आंखों से उतर कर दिल में
हमेशा के लिए कैद हो जाते हैं तो कुछ आंखों ही आंखों में रह जाते हैं. इश़्क हर
दौर में मौजूद रहा है तो हर दौर में इश्क के मायने भी अलग-अलग होते गए है। इंदौर
की वो गलियां जिनमें उपभोक्तावाद ने तेजी से अपने पैर पसारे औऱ देखते-देखते ही
निमाडी और मराठी गीतों की धुनें ना कब पब, डिस्को और मॉल की रंगीनियों में लाउड हो
गए किसी को पता ही नहीं चला। एक मध्यम कद काठी का शहर जब तेजी से अपने पैर फैलाता
है तो वो सब आत्मसात कर लेता है। उसके चेहरे की मुस्कुराहट से लेकर आत्मा की सौंधी
खुशबू सब मलीन हो जाती है। लेकिन इस दौर में भी इस शहर की एक जोडी आंखे बडी शिद्दत
से इस बदलाव के बीच कुछ परिवर्तन को बडे गौर से निहार रही थी। स्वाभाविक उसका इस
शहर को इस बदलना कुछ रास नहीं आ रहा था, और यही तड़प मनीषा के ये इश्क के रूप में
हमारे सामने आया।
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